हरिवंश राय बच्चन की आत्मकथा ‘नीड़ का निर्माण फिर’ की समीक्षा

साहित्य में ‘आत्मकथा’ उस विधा को कहते हैं जिसमें कोई लेखक अपने ही जीवन की कहानी को खुद लिखता है। हिंदी साहित्य में महान कवि हरिवंशराय बच्चन जी की आत्मकथा का बहुत ऊँचा स्थान है। उन्होंने अपने जीवन की कहानी को चार भागों में लिखा था। इनमें से दूसरा भाग है— ‘नीड़ का निर्माण फिर’।इस … Read more

हरिवंश राय बच्चन की आत्मकथा ‘नीड़ का निर्माण फिर’ का सारांश

हिंदी के महान कवि हरिवंशराय बच्चन जी की यह आत्मकथा सिर्फ उनके जीवन की कहानी नहीं है। यह इंसान के संघर्ष, गिरने, फिर से उठने और हर हाल में जीने की इच्छा की एक बहुत बड़ी और सच्ची कहानी है। उनकी आत्मकथा चार भागों में छपी थी। इनमें से दूसरा भाग है— ‘नीड़ का निर्माण … Read more

रेखाचित्र के तत्त्वों के आधार पर ‘पुरुष और परमेश्वर’ रेखाचित्र की समीक्षा अथवा विशेषताएँ

रेखाचित्र का अर्थ — ‘रेखाचित्र’ शब्द अंग्रेजी भाषा के ‘स्केच’ (Sketch) शब्द का हिंदी अनुवाद है। यह दो शब्दों के मेल से बना है— ‘रेखा’ और ‘चित्र’। जिस प्रकार कोई चित्रकार कैनवस पर कुछ आड़ी-तिरछी रेखाएँ खींचकर किसी व्यक्ति या दृश्य का सजीव चित्र बना देता है, ठीक उसी प्रकार जब कोई साहित्यकार शब्दों के … Read more

रामवृक्ष बेनीपुरी के रेखाचित्र “पुरुष और परमेश्वर” का सार

रामवृक्ष बेनीपुरी जी द्वारा रचित ‘पुरुष और परमेश्वर’ एक अत्यंत मार्मिक, दार्शनिक और वैचारिक रेखाचित्र है, जो उनके प्रसिद्ध निबंध संग्रह ‘गेहूँ और गुलाब’ का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। इस रचना में बेनीपुरी जी ने मनुष्य (पुरुष) और ईश्वर (परमेश्वर) के बीच के सदियों पुराने संबंधों, धार्मिक मान्यताओं और मानवीय मनोविज्ञान का बहुत ही तार्किक … Read more

नव्यतर गद्य विधाएँ ( वस्तुनिष्ठ प्रश्न )

नीड़ का निर्माण फिर ( हरिवंशराय बच्चन ) जीप पर सवार इल्लियाँ ( शरद जोशी ) बयालीस के ज्वार की लहरों में (कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर ) पुरुष और परमेश्वर (रामवृक्ष बेनीपुरी ) यह भी पढ़ें : नव्यतर गद्य विधाएँ ( BA 6th Semester Kuk ) ( महत्वपूर्ण प्रश्न )

“जीप पर सवार इल्लियाँ” व्यंग्य की समीक्षा

“जीप पर सवार इल्लियाँ” हिंदी के सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार शरद जोशी द्वारा रचित एक अत्यंत चुटीली और मारक व्यंग्य रचना है। इस पाठ में लेखक ने भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था की सुस्ती, कृषि विभाग के अधिकारियों के भ्रष्टाचार और किसानों के प्रति उनकी घोर संवेदनहीनता पर करारी चोट की है। ​इस रचना में ‘इल्ली’ को केवल चने … Read more

“जीप पर सवार इल्लियाँ” व्यंग्य लेख का उद्देश्य / संदेश / मूल भाव

हिंदी साहित्य के मूर्धन्य व्यंग्यकार शरद जोशी द्वारा रचित “जीप पर सवार इल्लियाँ” केवल एक कहानी नहीं है, बल्कि यह आज़ाद भारत की भ्रष्ट प्रशासनिक व्यवस्था, सरकारी अफसरों के खोखलेपन और किसानों की दयनीय स्थिति पर किया गया एक बेहद तीखा और मारक व्यंग्य है। साहित्य में ‘व्यंग्य’ वह विधा है जिसमें समाज की बुराइयों … Read more

“जीप पर सवार इल्लियाँ” व्यंग्य का सार

यह प्रसिद्ध रचनाकार शरद जोशी जी द्वारा लिखा गया एक तीखा व्यंग्य है। इस पाठ का मुख्य विषय हमारे देश की सरकारी व्यवस्था, अफसरशाही का खोखलापन और किसानों के प्रति उनकी संवेदनहीनता है।अक्सर सरकार किसानों की भलाई के लिए योजनाएँ बनाती है और अधिकारी खेतों के दौरे करते हैं। लेकिन असलियत में, यह सब केवल … Read more

‘बयालीस के ज्वार की लहरों में’ संस्मरण का सार

कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ जी का यह संस्मरण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे निर्णायक और उग्र चरण 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ (Quit India Movement) का अत्यंत सजीव और रोंगटे खड़े कर देने वाला चित्रण है। संस्मरण की शुरुआत में ही लेखक उस समय के माहौल का खाका खींचते हुए बताते हैं कि उन दिनों भारतवासी … Read more

संस्मरण किसे कहते हैं? संस्मरण विधा के आधार पर ‘बयालीस के ज्वार की लहरों में’ की समीक्षा

संस्मरण हिंदी गद्य साहित्य की एक बहुत ही महत्वपूर्ण विधा है, जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘सम्यक स्मरण’ यानी किसी बात को भली-भांति याद करना। जब कोई लेखक अपने जीवन में घटी किसी महत्त्वपूर्ण घटना, अपने संपर्क में आए किसी विशेष व्यक्ति, या किसी विशिष्ट ऐतिहासिक कालखंड की यादों को अपनी स्मृति के आधार पर कलात्मक … Read more

‘बयालीस के ज्वार की लहरों में’ संस्मरण की विशेषताएँ / मूल संवेदना /उद्देश्य /संदेश / निहित राष्ट्रीय भावना

कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ जी द्वारा रचित संस्मरण ‘बयालीस के ज्वार की लहरों में’ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का एक सजीव और मार्मिक चित्रण है। इस पाठ में लेखक ने बताया है कि कैसे 9 अगस्त 1942 को सभी बड़े नेताओं के जेल जाने के बाद भी भारत की जनता बिना … Read more

​प्रस्तुति कौशल क्या है? ​प्रस्तुति कौशल को बेहतर बनाने की तकनीक या उपाय

​प्रस्तुति कौशल (Presentation Skills) ​प्रस्तुति कौशल क्या है? प्रस्तुति कौशल का सरल अर्थ है—अपने विचारों, सूचनाओं या ज्ञान को किसी समूह के सामने इस प्रकार रखना कि वे उसे आसानी से समझ सकें और उससे प्रभावित हों। यह केवल ‘बोलना’ नहीं है, बल्कि अपनी बात को सही ढंग से ‘पहुँचाने’ की कला है। चाहे स्कूल … Read more

साक्षात्कार किसे कहते हैं? साक्षात्कार की तकनीक या बेहतर बनाने के उपाय

साक्षात्कार (Interview) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक व्यक्ति किसी विशेष उद्देश्य के लिए आमने-सामने बैठकर बातचीत करते हैं। इसमें एक व्यक्ति (साक्षात्कारकर्ता) सवाल पूछता है और दूसरा व्यक्ति (साक्षात्कारार्थी) उन सवालों के जवाब देता है। इसका मुख्य उद्देश्य व्यक्ति के ज्ञान, कौशल, आत्मविश्वास और उसके व्यक्तित्व की उपयुक्तता को परखना … Read more

शिष्टाचार का अर्थ व महत्त्व / आवश्यकता

शिष्टाचार का अर्थ — शिष्टाचार दो शब्दों ‘शिष्ट’ और ‘आचार’ से मिलकर बना है। ‘शिष्ट’ का अर्थ है सभ्य या सुसंस्कृत और ‘आचार’ का अर्थ है व्यवहार। अतः शिष्टाचार का शाब्दिक अर्थ है – सभ्य व्यवहार। समाज में दूसरों के साथ सम्मानपूर्वक, विनम्रता और शालीनता के साथ बातचीत करना और पेश आना ही शिष्टाचार कहलाता … Read more

नव्यतर गद्य विधाएँ ( BA 6th Semester Kuk ) ( महत्वपूर्ण प्रश्न )

इकाई 1 ( व्याख्या हेतु ) ▪️माधव प्रसाद मिश्र के पत्र ( माधव प्रसाद मिश्र ) ▪️नीड़ का निर्माण फिर ( हरिवंशराय बच्चन ) pdf 👇 ▪️जीप पर सवार इल्लियाँ ( शरद जोशी ) pdf 👇 ▪️बयालीस के ज्वार की लहरों में ( कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर ) pdf 👇 ▪️पुरुष और परमेश्वर ( रामवृक्ष बेनीपुरी … Read more

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