
◼️ सूर्य, चंद्रमा तथा वे सभी वस्तुएं जो रात को आसमान में चमकते हैं ; खगोलीय पिंड कहलाती हैं |
◼️ वे खगोलीय पिंड जो गर्म होते हैं तथा गैसों से बने होते हैं जिनके पास अपनी ऊष्मा तथा प्रकाश होता है ; उन्हें तारा कहते हैं | सूर्य भी एक तारा है |
◼️ तारामंडल ( Planetarium ) : तारों का एक ऐसा समूह जो आकाश में विशेष आकृति के रूप में नजर आता है ; उसे तारामंडल या नक्षत्र मंडल ( Planetarium ) कहते हैं | अर्सा मेजर या बिग बियर ( वृहत सप्तर्षि ) ऐसा ही एक नक्षत्र मंडल है |
◼️ सप्तर्षि की सहायता से हम ध्रुव तारे ( Pole Star ) की स्थिति के विषय में जान सकते हैं | ध्रुव तारा ( Pole Star ) आसमान में हमेशा एक ही स्थान पर रहता है |
◼️ग्रह ( Planet ) : ऐसे आकाशीय पिंड जो सूर्य ( The Sun ) के चारों ओर चक्कर लगाते हैं ; उन्हें ग्रह ( Planet ) कहते हैं | इनका अपना प्रकाश तथा ऊष्मा नहीं होती |
🔷 ग्रह को अंग्रेजी में प्लेनेट ( Planet ) कहते हैं | यह शब्द ग्रीक भाषा के ‘प्लेनेटाइ‘ शब्द से बना है जिसका अर्थ होता है-परिभ्रमण अर्थात चारों ओर घूमने वाला |
◼️ बृहस्पति, शनि तथा अरुण (यूरेनस) के चारों ओर छल्ले हैं | यह छल्ले विभिन्न पदार्थों के असंख्य छोटे-छोटे पिंडों से बनी पट्टियां हैं | पृथ्वी से इन छल्लो को केवल शक्तिशाली दूरबीन की सहायता से ही देखा जा सकता है |
◼️ उपग्रह ( Satellite ) : ग्रहों के चारों ओर परिक्रमा करने वाले आकाशीय पिंडों को उपग्रह कहते हैं | हमारी पृथ्वी का केवल एक उपग्रह है – चंद्रमा |
चन्द्रमा का व्यास पृथ्वी के व्यास का केवल एक चौथाई है | यह पृथ्वी से केवल 3, 84,400 किलोमीटर दूर है |
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