मातृमंदिर ( मैथिलीशरण गुप्त )

मातृमंदिर : मैथिलीशरण गुप्त ( Matrimandir : Maithilisharan गुप्त )
भारतमाता का यह मंदिर, समता का संवाद यहाँ, सबका शिव-कल्याण यहाँ हैं, पावें सभी प्रसाद यहाँ। 
नहीं चाहिये बुद्धि वैर की, भला प्रेम-उन्माद यहाँ, कोटि-कोटि कण्ठों से मिलकर उठे एक जयनाद यहाँ।
जाति, धर्म या सम्प्रदाय का, नहीं भेद-व्यवधान यहाँ |
सबका स्वागत सबका आदर, सबका सम सम्मान यहाँ।
राम रहीम, बुद्ध ईसा का, सुलभ एक सा ध्यान यहाँ,
भिन्न-भिन्न नव-संस्कृतियों के गुण-गौरव का ज्ञान यहाँ।
सब तीर्थो का एक तीर्थ यह, हृदय पवित्र बना ले हम,
आओ यहाँ अजातशत्रु बन, सबको मित्र बना लें हम।
रेखाएं प्रस्तुत हैं अपने, मन के चित्र बना लें हम, सौ-सौ आदर्शों को लेकर, एक चरित्र बना लें हम।
मिला सेव्य का हमें पुजारी, सफल काम उस न्यायी का,
मुक्तिलाभ कर्तव्य यहाँ हैं, एक-एक अनुयायी का।
कोटि-कोटि कंठों से मिलकर
उठे एक जयनाद यहाँ
सबका शिव कल्याण यहाँ हैं
पावें सभी प्रसाद यहाँ।
बैठो माता के आँगन में, नाता भाई-भाई का, समझे उसकी प्रसव वेदना, वही लाल है माई का।
एक साथ मिल बाँट लो। अपने हर्ष विषाद यहाँ | सबका शिव कल्याण यहाँ हैं, पावें सभी प्रसाद यहाँ।

प्रसंग — प्रस्तुत काव्यांश कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित बी ए प्रथम सेमेस्टर की हिंदी मेजर की पाठ्य-पुस्तक “हिंदी भाषा एवं आधुनिक कविता” में संकलित मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित कविता ‘मातृभूमि’ से अवतरित है | इन पंक्तियों में गुप्त जी ने मातृभूमि के प्रति अपने प्रेम को अभिव्यक्त किया है |

व्याख्या — इन पंक्तियों में कवि ने भारत भूमि को भारत माता का मंदिर कहते हुए इसकी विशेषताओं का वर्णन किया है | कवि कहता है कि भारत माता के इस मंदिर में सबके साथ समानता का व्यवहार किया जाता है | यहीं सभी के कल्याण की कामना की जाती है और सभी को सुख रूपी प्रसाद की प्राप्ति होती है | द्वेष की भावना से युक्त बुद्धि की यहाँ किसी को चाह नहीं, सभी भारतवासी प्रेम की मस्ती में निमग्न रहते हैं | भारत के करोड़ों वासी मिलकर भारत माता का जयनाद करते हैं | जाति, धर्म और सम्प्रदाय के नाम पर यहाँ कोई भेदभाव नहीं किया जाता ; सभी एक-दूसरे का आदर व मान-सम्मान करते हैं | भारत भूमि पर राम, रहीम, बुद्ध और ईसा मसीह का एक सामान ध्यान लगाया जाता है | भारत में भिन्न-भिन्न संस्कृतियों के गुणों व गौरव का गान किया जाता है | भारत वास्तव में सभी धर्मों के तीर्थ स्थानों का तीर्थ है अर्थात सभी धर्मों के तीर्थ स्थान यहाँ मिलते हैं | आओ हम अजातशत्रु बन सभी को अपना मित्र बना लें | हमारे मन में विभिन्न महापुरुषों के उदाहरणों व जीवन-चरित्रों की रेखाएं उपस्थित हैं उनसे हम एक आदर्श चरित्र का निर्माण कर सकते हैं | हमें महात्मा गांधी के रूप में सेवा का एक ऐसा पुजारी मिला जिसका सम्पूर्ण कार्य हमारे लिए आदर्श स्थापित करता है | भारत माता के प्रत्येक अनुयायी का एकमात्र उद्देश्य मोक्ष की प्राप्ति है | इस देश के करोड़ों कंठों से मिलकर एक सामूहिक जयनाद होता है अर्थात सभी ‘भारत-माता की जय’ का जयघोष करते हैं | यहाँ सबका कल्याण होता है और सभी को सुख रूपी प्रसाद की प्राप्ति होती है | अंत में कवि सभी भारतवासियों को प्रेरित करते हुए कहता है कि हम सभी भारत-माता के आँगन में मिलजुल कर रहें क्योंकि हम सभी में भाई-भाई का रिश्ता है | जो अपनी माँ की प्रसव-वेदना को जानता है, वही अपनी माँ का सच्चा पुत्र होता है अर्थात वह जीवन पर्यंत अपनी माँ के कष्टों को दूर करने के लिए प्रयासरत रहता है | सभी भारतवासी एक-दूसरे के सुख-दुःख बाँट लें | भारत माता रूपी इस मंदिर में सबका परम कल्याण होता है और सभी को सुख रूपी प्रसाद की प्राप्ति होती है |

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