प्रेमचंद का साहित्यिक परिचय ( 1880 – 1936 ईo)

जीवन परिचय प्रेमचंद ( Premchand ) हिन्दी के प्रसिद्ध लेखक थे। उनका वास्तविक नाम धनपतराय था | उनका जन्म 31 जुलाई, 1880 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी के पास लमही गाँव में हुआ था। वे हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में लिखते थे और उन्हें भारतीय साहित्य में उपन्यास सम्राट के रूप में जाना जाता … Read more

हजारी प्रसाद द्विवेदी ( 1907 – 1979 ईo)

जीवन परिचय हजारी प्रसाद द्विवेदी हिन्दी के प्रमुख साहित्यकार हैं | उनका जन्म 1907 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के ‘आरत दुबे का छपरा’ नामक गाँव में हुआ था | उनकी आरंभिक शिक्षा बलिया में ही हुई | सन 1927 में उन्होंने दसवीं कक्षा उत्तीर्ण की | उन्होंने शांति निकेतन, काशी विश्वविद्यालय और … Read more

नाख़ून क्यों बढ़ते हैं : मुख्य उद्देश्य या संदेश

‘नाख़ून क्यों बढ़ते हैं’ हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित एक प्रसिद्ध ललित निबंध है | यह निबंध उनके निबंध संग्रह ‘कल्पलता’ में संकलित है जो 1951 में प्रकशित हुआ था | ‘नाखून क्यों बढ़ते हैं’ निबंध मनुष्य की मनुष्यता व उसमें निहित पशुता पर विचार करता है। लेखक के अनुसार नाखुनों का बढ़ना मनुष्य की … Read more

वस्तुनिष्ठ प्रश्न ( हिन्दी गद्य साहित्य ) बी ए तृतीय सेमेस्टर ( NEP )

बूढ़ी काकी ( मुंशी प्रेमचंद ) ◾मुंशी प्रेमचन्द का जन्म कब और कहाँ हुआ? ▪️ 31 जुलाई, 1880 में वाराणसी के लम्ही नामक गाँव में | ◾ मुंशी प्रेमचंद की मृत्यु कब हुई? ▪️ सन 1936 में | ( 8 अप्रैल ) ◾ किस हिन्दी साहित्यकार को कहानी सम्राट व उपन्यास सम्राट कहा जाता है? … Read more

मुहावरे व लोकोक्तियाँ

मुहावरा — मुहावरा एक ऐसा वाक्यांश होता है जिसका अर्थ उसके शब्दों के अर्थ से भिन्न होता है। यह भाषा में विशेष अर्थ या भावना व्यक्त करने के लिए प्रयोग होता है। मुहावरों का उपयोग किसी विशेष स्थिति, भावना या विचार को संक्षेप में और प्रभावशाली तरीके से व्यक्त करने के लिए किया जाता है। … Read more

पर्यायवाची शब्द : अर्थ व उदाहरण

पर्यायवाची शब्द वे शब्द होते हैं जो प्राय: एक ही अर्थ को व्यक्त करते हैं और एक दूसरे के स्थान पर प्रयोग किया जा सकते हैं परंतु उनके अर्थ में कुछ सूक्ष्म भिन्नता हो सकती है ; जैसे — स्त्री — महिला, अबला, ललना | पर्यायवाची शब्दों को समानार्थक शब्द भी कहते हैं | पर्यायवाची … Read more

अविकारी शब्द : अर्थ व प्रकार

वाक्य में प्रयोग करते समय जिन शब्दों में कोई विकार या या परिवर्तन ना हो उन शब्दों को अविकारी शब्द कहते हैं | जैसे — और, तथा, किन्तु, ही, भी, तो, तक आदि | अविकारी शब्दों को ‘अव्यय’ भी कहा जाता है | अविकारी शब्दों के भेद अविकारी ( अव्यय ) शब्दों के पाँच भेद … Read more

अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद

अर्थ के आधार पर वाक्य के आठ भेद हैं :- (1) विधानवाचक वाक्य जिन वाक्यों में किसी काम के करने या होने की सूचना दी जाये उन्हें, विधानवाचक वाक्य कहते हैं | कुछ विद्वान् इन्हें सकारात्मक वाक्य भी कहते हैं | उदाहरण — (i) लड़का जाता है | (ii) सीता सो रही है | (iii) … Read more

रचना के आधार पर वाक्य के भेद

रचना के आधार पर वाक्य के तीन भेद माने गए हैं – (क ) सरल या साधारण वाक्य, (ख ) संयुक्त वाक्य तथा (ग ) मिश्र या जटिल वाक्य | (क ) सरल वाक्य – जिस वाक्य में एक कर्त्ता और एक क्रिया अथवा एक उद्देश्य और एक विधेय होता है, उसे सरल वाक्य कहा … Read more

उपसर्ग और प्रत्यय

उपसर्ग ( Upsarg ) उपसर्ग वे वर्ण या शब्दांश हैं, जो किसी मूल शब्द के पहले जोड़े जाते हैं और उनके अर्थ में परिवर्तन करते हैं। उदाहरण : अ — असफल, अभाव, असत्य अप — अपमान, अपशकुन, अपयश अधि — अधिकार, अधिभार, अधिनियम उपसर्ग के प्रकार ( Upsarg Ke Prakar ) उपसर्ग मुख्यत: तीन प्रकार … Read more

पत्र लेखन : अर्थ, परिभाषा, भेद व विशेषताएँ

पत्र एक लिखित संवाद का रूप है, जिसे किसी व्यक्ति, संगठन, या संस्था को भेजा जाता है। यह एक औपचारिक या अनौपचारिक तरीके से जानकारी, विचार, अनुरोध, या संवाद सांझा करने का एक साधन है। पत्र आमतौर पर एक निश्चित प्रारूप और संरचना का पालन करता है | इसमें निम्नलिखित तत्त्व शामिल होते हैं : … Read more

विकारी शब्द : अर्थ व भेद – संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया ( Vikari Shabd : Arth Aur Bhed )

विकारी शब्द का अर्थ वाक्य में प्रयोग करते समय जिन शब्दों में कुछ परिवर्तन हो जाता है उन्हें विकारी शब्द कहते हैं ; जैसे – काला, नदी, पंखा आदि | विकारी शब्द के भेद ( Vikari shabd Ke Bhed ) विकारी शब्द मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं : (1) संज्ञा, (2) सर्वनाम, … Read more

शब्द और पद ( Shabd Aur Pad )

शब्द : दो या दो से अधिक वर्णों के सार्थक समूह को शब्द कहते हैं | जैसे – कमल, फूल, काला आदि शब्द हैं लेकिन अउइए, कफच, चबट आदि वर्णों का समूह होने पर भी शब्द नहीं हैं क्योंकि इनसे किसी अर्थ की अभिव्यक्ति नहीं होती | अतः वर्णों के ऐसे समूह को ही शब्द … Read more

वाक्य : अर्थ, परिभाषा एवं स्वरूप

भाषा का प्रमुख लक्ष्य विचारों का संप्रेषण है | इस दृष्टि से वाक्य का विशेष महत्व है क्योंकि वाक्य पूर्ण अर्थ की अभिव्यक्ति की क्षमता रखता है| वैसे तो शब्द भी अपने आप में सार्थक होते हैं परंतु किसी भाव की अभिव्यक्ति तभी हो पाती है जब सार्थक शब्दों को एक निश्चित क्रम में व्यवस्थित … Read more

शब्द : अर्थ, परिभाषा व प्रकार

शब्द : दो या दो से अधिक वर्णों के सार्थक समूह को शब्द कहते हैं | शब्द के दो रूप होते हैं – मूल शब्द ( प्रातिपादिक शब्द ) और पद | मूल शब्द या प्रातिपादिक शब्द वह आधारभूत शब्द है लेकिन जब मूल शब्द लिंग,वचन,कारक, काल आदि के अनुसार उपसर्ग, प्रत्यय आदि लगाने से … Read more

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