महत्त्वपूर्ण प्रश्न ( बी ए तृतीय सेमेस्टर – हिंदी )

(1) यह प्रश्न व्याख्या से सम्बंधित होगा जिसके अंतर्गत विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित पाठ्य-पुस्तक ‘आधुनिक हिंदी कविता’ से चार पद्यांश व्याख्या के लिए दिए जाएंगे | परीक्षार्थी को किन्हीं दो की सप्रसंग व्याख्या करनी होगी | यह प्रश्न 12 ( 6+6 ) अंक का होगा | (i) पवनदूती / पवन दूतिका ( Pavandooti ) – प्रिय … Read more

ई-मेल ( E-mail ) : अर्थ, परिभाषा और प्रक्रिया

ई-मेल इलेक्ट्रॉनिक मेल का संक्षिप्त रूप है | इसमें नेटवर्क द्वारा एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर तक शीघ्र ही सूचना का संचार किया जाता है | इस प्रकार भेजी गई सूचना को दूसरे कंप्यूटर पर पढ़ा जा सकता है व उसको सुरक्षित रखा जा सकता है | आवश्यकता पड़ने पर उस सूचना का मुद्रण भी … Read more

अनुवाद : अर्थ, परिभाषा एवं स्वरूप

अनुवाद का अर्थ अनुवाद शब्द संस्कृत की ‘वद्’ धातु में ‘अनु’ उपसर्ग तथा ‘घयं’ प्रत्यय लगाने से बना है | अनु का अर्थ है – पीछे और वाद का अर्थ है-कथन। अतः अनुवाद उस कथन को कहा जाता है जो किसी पूर्व कथन का अनुसरण करके कहा गया हो या फिर लिखा गया हो। अंग्रेजी … Read more

महादेवी वर्मा का साहित्यिक परिचय

जीवन-परिचय महादेवी वर्मा ( Mahadevi Varma ) हिन्दी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से हैं। वे हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के प्रमुख स्तंभों जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और सुमित्रानंदन पंत के साथ छायावााद की आधार स्तंभ मानी जाती हैं। उन्हें आधुनिक काल की मीरा कहा जाता है | महादेवी वर्मा जी का जन्म … Read more

कामायनी ( जयशंकर प्रसाद ) – आनन्द सर्ग

( ‘कामायनी’ जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित प्रसिद्ध महाकाव्य है | सन 1936 में प्रकाशित यह महाकाव्य आलोचनात्मक दृष्टि से खड़ी बोली हिंदी का सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य माना जाता है | ) चलता था धीरे-धीरे, वह एक यात्रियों का दल;सरिता के रम्य पुलिन में, गिरि पथ से, ले निज संबल ।था सोम लता से आवृत्त, वृष धवल … Read more

मैथिलीशरण गुप्त का साहित्यिक परिचय ( Mathilisharan Gupt Ka Sahityik Parichay )

जीवन परिचय – श्री मैथिलीशरण गुप्त द्विवेदी युग के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि थे | उनका जन्म 3 अगस्त, 1886 को उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के चिरगांव नामक स्थान पर हुआ | उनके पिता का नाम सेठ रामचरण गुप्त तथा माता का नाम काशी बाई था | वे बचपन से ही साहित्य में रुचि रखते … Read more

आँसू ( Aansu ) : जयशंकर प्रसाद

इस करुणा कलित हृदय में अब विकल रागिनी बजती क्यों हाहाकार स्वरों में वेदना असीम गरजती? शीतल ज्वाला जलती है ईंधन होता दृग जल का यह व्यर्थ सांस चल-चलकर करती है काम अनिल का | (1) जो घनीभूत पीड़ा थी मस्तक में स्मृति-सी छायी दुर्दिन में आँसू बनकर वह आज बरसने आयी शशि मुख पर … Read more

वे मुस्काते फूल नहीं ( Ve Muskate Fool Nahin ) : महादेवी वर्मा

वे मुस्काते फूल नहीं – जिनको आता है मुरझाना, वे तारों के दीप नहीं – जिनको भाता है बुझ जाना ; (1) वे नीलम के मेघ नहीं – जिनको है घुल जाने की चाह, वह अनंत ऋतुराज, नहीं- जिसने देखी जीने की राह | (2) वे सूने से नयन, नहीं- जिनमें बनाते आँसू-मोती, वह प्राणों … Read more

दुख की बदली ( Dukh Ki Badli ) : महादेवी वर्मा

मैं नीर-भरी दुख की बदली स्पंदन में चिर निस्पंद बसा, क्रंदन में आहत विश्व हंसा, नयनों में दीपक-से जलते, पलकों में निर्झरिणी मचली | (1) मेरा पग-पग संगीत-भरा, श्वासों से स्वप्न-पराग झरा, नभ के नव रंग बुनते दुकूल, छाया में मलय-बयार पली | (2) में क्षितिज-भृकुटि पर घिर धूमिल, चिंता का भार बनी अविरल, रज-कण … Read more

कौन तुम मेरे हृदय में ( Kaun Tum Mere Hriday Mein ) : महादेवी वर्मा

कौन तुम मेरे हृदय में? कौन मेरी कसक में नित मधुरता भरता अलक्षित? कौन प्यासे लोचनों में घुमड़ घिर झरता अपरिचित? स्वर्ण-स्वप्नों का चितेरा नींद के सूने निलय में ! कौन तुम मेरे हृदय में? (1) अनुसरण निश्वास मेरे कर रहे किसका निरंतर? चूमने पदचिन्ह किसके लौटते यह श्वास फिर-फिर? कौन बंदी कर मुझे अब … Read more

कह दे माँ क्या अब देखूँ ! ( Kah De Maan Kya Ab Dekhun ) : महादेवी वर्मा

देखूँ खिलती कलियाँ या प्यासे सूखे अधरों को, तेरी चिर यौवन-सुषमा या जर्जर जीवन देखूँ ! देखूँ हिम-हीरक हँसते हिलते नीले कमलों पर, या मुरझाई पलकों से झरते आँसू-कण देखूँ ! (1) प्रसंग — प्रस्तुत अवतरण महादेवी वर्मा के द्वारा रचित कविता ‘कह दे माँ क्या अब देखूँ’ से अवतरित है जिसमें कवयित्री ने प्रकृति … Read more

फूल के बोल ( Fool Ke Bol ) : भारत भूषण अग्रवाल

हँसते-खिलखिलाते रंग-बिरंगे फूल क्यारी में देख कर जी तृप्त हो गया | नथुनों से प्राणों तक खिंच गयी गंध की लकीर-सी आँखों में हो गई रंगों की बरसात ; अनायास कह उठा : ‘वाह, धन्य है वसंत ऋतु !’ (1) लौटने को पैर जो बढ़ाये तो क्यारी के कोने में दुबका एक नन्हा फूल अचानक … Read more

दूँगा मैं ( Dunga Main ) : भारत भूषण अग्रवाल

दूँगा मैं नहीं, नहीं हिचकूँगा कि मेरी अकिंचनता अनन्य है कि मैं ऐसा हूँ कि मानो हूँ ही नहीं हाँ, नहीं हिचकूँगा कि तुम्हें तृप्त कर पाऊं : मुझ में सामर्थ्य कहाँ कि अपने को नि:स्व करके भी तुम्हें बांध नहीं पाऊंगा और नहीं सोचूंगा यह भी कि आखिर तो तुम मुझे छोड़ चले जाओगे … Read more

आने वालों से एक सवाल ( Aane Valon Se Ek Sawal ) : भारत भूषण अग्रवाल

तुम, जो आज से पूरे सौ वर्ष बाद मेरी कविताएं पढ़ोगे तुम, मेरी धरती की नयी पौध के फूल तुम, जिनके लिए मेरा तन-मन खाद बनेगा तुम, जब मेरी इन रचनाओं को पढ़ोगे तो तुम्हें कैसा लगेगा : इस का मेरे मन में बड़ा कौतूहल है | (1) बचपन में तुम्हें हिटलर और गांधी की … Read more

जयशंकर प्रसाद का साहित्यिक परिचय ( Jaishankar Prasad Ka Sahityik Parichay )

जीवन परिचय – जयशंकर प्रसाद का जन्म सन 1889 में काशी में हुआ था | जयशंकर प्रसाद जी धनी परिवार से संबंध रखते थे | इनका बचपन बहुत खुशहाली से बीता | इनकी आरंभिक शिक्षा घर पर ही हुई परंतु वह केवल सातवीं कक्षा तक अपनी पढ़ाई जारी रख सके | जब वे 12 वर्ष … Read more