लोकतंत्र का संकट ( Loktantra ka Sankat ) रघुवीर सहाय
लोकतंत्र का संकट ( Loktantra Ka Sankat ) पुरुष जो सोच नहीं पा रहे किंतु अपने पदों पर आसीन है और चुप हैं तानाशाह क्या तुम्हें इनकी भी जरूरत होगी जैसे तुम्हें उनकी है जो कुछ न कुछ उटपटांग विरोध करते रहते हैं | सब व्यवस्थाएं अपने को और अधिक संकट के लिए तैयार करती … Read more