फूल, मोमबत्तियां, सपने ( Fool, Mombattiyan, Sapne ) : डॉ धर्मवीर भारती
यह फूल, मोमबत्तियां और टूटे सपने ये पागल क्षण, यह काम-काज दफ्तर-फाइल, उचाट-सा जी भत्ता वेतन ! ये सब सच है ! इनमें से रत्ती भर न किसी से कोई कम, अंधी गलियों में पथभ्रष्टों के गलत कदम या चंदा की छाया में भर -भर आने वाली आंखें नम, बच्चों की-सी दूधिया हँसी या मन … Read more